सऊदी अरब कफ़ाला नियम: पहले क्या नियम था और अब बिना कफ़ील की मर्ज़ी के जॉब कैसे बदलें

सऊदी अरब में काम करने वाले भारत और दूसरे देशों के लाखों भाइयों के लिए कफ़ाला सिस्टम (Kafala System) यानी जॉब बदलना हमेशा से सबसे बड़ा और जरूरी टॉपिक रहा है। सऊदी अरब के मिनिस्ट्री ऑफ ह्यूमन रिसोर्सेज एंड सोशल डेवलपमेंट (MHRSD) ने लेबर रिफॉर्म इनिशिएटिव (LRI) के तहत पुराने कफ़ाला नियमों को पूरी तरह बदल दिया है। आज के समय में, Qiwa प्लेटफॉर्म के आने से कंपनियों और संस्थाओं में काम करने वाले भाइयों को जॉब बदलने की पूरी आज़ादी मिल चुकी है। आइए जानते हैं कि पहले क्या नियम था और अब बिना कफ़ील की मंजूरी के कफ़ाला लेने का

नया तरीका क्या है।

1. पहले क्या नियम था? (Old Saudi Kafala Law)

पुराने स्पॉन्सरशिप या कफ़ाला कानून के तहत एक विदेशी कर्मचारी के सारे राइट्स पूरी तरह से उसके कफ़ील (स्पॉन्सर या मालिक) के हाथ में सुरक्षित होते थे:

  • कफ़ील की तानाशाही: अगर किसी भाई को किसी दूसरी कंपनी से बहुत अच्छा सैलरी पैकेज या ऑफर मिलता भी था, तो भी वह बिना पुराने कफ़ील के सिग्नेचर और बिना एनओसी (NOC – No Objection Certificate) के अपनी जॉब नहीं बदल सकता था।
  • शोषण का खतरा: कई मामलों में कफ़ील पेपर साइन करने या ट्रांसफर देने के बदले गैर-कानूनी तरीके से मोटी रकम की मांग करते थे, जिससे आम मजदूर भाई भारी मेंटल and फाइनेंशियल प्रेशर में आ जाते थे।

2. अब क्या नया नियम है? (New Qiwa Law)

सऊदी सरकार ने डिजिटल बदलाव करते हुए पुराने नियमों को पूरी तरह खत्म कर दिया है। अब Qiwa पोर्टल पर निम्नलिखित विशेष परिस्थितियों में कोई भी कंपनी या इंस्टीट्यूशन का कर्मचारी अपने पुराने कफ़ील (Employer) से पूछे बिना सीधे कफ़ाला (Job Transfer) ले सकता है:

डिजिटल कॉन्ट्रैक्ट पूरा होने पर (Digital Contract Completion)

अगर कर्मचारी का मौजूदा डिजिटल कॉन्ट्रैक्ट पूरा हो चुका है, तो कुछ मामलों में वह पुराने कफ़ील की अलग से मंजूरी लिए बिना दूसरी कंपनी में जॉब के लिए आगे बढ़ सकता है।

लेकिन यहां एक जरूरी बात समझना बहुत जरूरी है। हर कंपनी के कॉन्ट्रैक्ट में नोटिस पीरियड एक जैसा नहीं होता। किसी कंपनी में 30 दिन, किसी में 60 दिन… और किसी में 90 दिन का नोटिस पीरियड हो सकता है। इसलिए जॉब बदलने से पहले कर्मचारी को अपने मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट को अच्छी तरह चेक कर लेना चाहिए और उसमें दिया गया नोटिस पीरियड देख लेना चाहिए।

अगर कर्मचारी को नई कंपनी से जॉब का ऑफर मिला है, तो उसे Qiwa में दिखाई देने वाली प्रोसेस और अपने कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों के हिसाब से आगे बढ़ना चाहिए। मौजूदा कंपनी को भी जॉब छोड़ने की जानकारी देना बेहतर रहता है, ताकि बाद में कोई परेशानी न हो।

नई कंपनी को Qiwa के जरिए जॉब का ऑफर देना होता है और कर्मचारी को उस जॉब के ऑफर को एक्सेप्ट करना होता है। इसके बाद Qiwa में कर्मचारी की जानकारी और लागू नियमों के हिसाब से प्रोसेस आगे बढ़ती है। सभी जरूरी शर्तें पूरी होने पर कर्मचारी का कफ़ाला ट्रांसफर नई कंपनी में किया जा सकता है।

अगर नई कंपनी जॉब का ऑफर देने के बाद कर्मचारी का कफाला ट्रांसफर नहीं करती है, तो कर्मचारी को अपनी सिचुएशन के हिसाब से आगे की प्रोसेस समझनी चाहिए। ऐसे मामले में यह मान लेना सही नहीं होगा कि हर हाल में फाइनल एग्जिट (खुरूज) ही लगेगा, बल्कि सब कुछ आपके इकामा (Iqama) और वर्क परमिट (Work Permit) के एक्सपायरी नियमों और सरकारी शर्तों के हिसाब से तय किया जाता है।

इसलिए जॉब छोड़ने या कंपनी बदलने से पहले Qiwa में अपनी मौजूदा सिचुएशन, कॉन्ट्रैक्ट और मौजूद ऑप्शन को अच्छी तरह चेक कर लेना चाहिए। जरूरत पड़ने पर मौजूदा कंपनी या संबंधित सरकारी डिपार्टमेंट से भी जानकारी ले सकते हैं।

सैलरी में देरी होने पर (Wage Protection)

अगर आपकी कंपनी या कफ़ील ने लगातार 3 महीने तक आपकी सैलरी नहीं दी है, तो सऊदी श्रम कानून के अनुसार आप तुरंत बिना किसी की परमिशन के सीधे अपना कफ़ाला दूसरी जगह ट्रांसफर कराने के हकदार हो जाते हैं।

इकामा रिन्यू न कराने पर (Not Renew Iqama)

यदि आपका कफ़ील या कंपनी आपका इकामा (Iqama) एक्सपायर होने के बाद 90 दिनों के अंदर उसे रिन्यू नहीं कराता है, तो आप कानूनी रूप से किसी भी नए कफ़ील के पास जाने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं।

कंपनी का रेड ज़ोन में होना (Company in Red Zone)

अगर आपकी कंपनी सऊदी सरकार के ‘निताकात’ (Nitaqat System) के तहत रेड ज़ोन (Red Zone) में चली जाती है, तो सरकार आपको बिना पुराने कफ़ील की मर्ज़ी के सीधे किसी ग्रीन या प्लैटिनम ज़ोन वाली कंपनी में जॉब बदलने की परमिशन देती है।


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