भारत से हर साल बड़ी संख्या में वर्कर भाई, ड्राइवर, इंजीनियर और दूसरे प्रोफेशनल्स अपने परिवार के बेहतर भविष्य और अच्छी कमाई के लिए सऊदी अरब जाते हैं। आज सऊदी अरब में लाखों भारतीय रह रहे हैं और अलग अलग कंपनियों, दुकानों, ऑफिसों, मेंटेनेंस, कंस्ट्रक्शन साइटों और दूसरे कामों में अपनी मेहनत कर रहे हैं।
लेकिन जो भाई पहली बार भारत से सऊदी जाने की सोच रहे हैं, उनके मन में कई सवाल होते हैं वहां रहने का माहौल कैसा होता है? भारतीय खाना आसानी से मिलता है या नहीं? रोज का खर्च कितना आता है? और सारी जरूरतें पूरी करने के बाद घर कितने पैसे भेज पाएंगे?

इस पोस्ट में हम समझेंगे कि सऊदी अरब में रहने वाले भारतीय वर्कर भाइयों और ड्राइवरों की रोजमर्रा की जिंदगी कैसी होती है और यहां रहने की असली तस्वीर क्या है।
रहने का माहौल और कमरा कैसा होता है?
सऊदी अरब में भारतीय भाइयों के रहने की व्यवस्था उनके काम और कंपनी के हिसाब से अलग-अलग होती है।
कंपनी में काम करने वाले वर्कर भाई: बड़ी कंस्ट्रक्शन, मेंटेनेंस और दूसरी कंपनियों में काम करने वाले कई भाइयों को कंपनी की तरफ से रहने की जगह दी जाती है। कई जगहों पर कैंप या शेयरिंग वाले कमरे होते हैं जहां एक कमरे में एक से ज्यादा वर्कर साथ रहते हैं।
कंपनियां रहने के साथ बिजली, पानी और आने-जाने की सुविधा भी देती हैं। लेकिन यह सुविधा हर कंपनी में एक जैसी नहीं होती।
ड्राइवर भाई: ड्राइवरों के रहने की व्यवस्था भी उनके कफील या कंपनी के हिसाब से अलग हो सकती है। किसी को अलग कमरा मिलता है तो किसी को शेयरिंग में रहना पड़ता है।
इसलिए सऊदी आने से पहले यह जरूर पता कर लें कि रहने की जगह कौन देगा और उसका खर्च कौन उठाएगा।
खान पान का माहौल: क्या भारतीय खाना आसानी से मिलता है?
खाने को लेकर सऊदी आने वाले नए भाइयों को ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है। सऊदी के बड़े शहरों में भारतीय और देसी खाना आसानी से मिल जाता है।
रियाद , जेद्दा और दूसरे इलाकों में आपको बिरयानी, रोटी, दाल, सब्जी, पराठा और अपने देश के कई तरह के खाने मिल जाएंगे।
कैंप में रहने वाले कई वर्कर भाई मिलकर खाना बनाते हैं। कुछ लोग महीने का मेस लगा लेते हैं और कुछ बाहर के होटल या रेस्टोरेंट से खाना खाते हैं।
अगर आप खुद खाना बनाते हैं तो खर्च को अपने हिसाब से कम ज्यादा किया जा सकता है।
घर जैसा सामान भी मिल जाता है
सऊदी के बड़े सुपरमार्केट और किराने की दुकानों में भारतीय चावल, आटा, दाल, मसाले और कई तरह की सब्जियां आसानी से मिल जाती हैं।
इसलिए विदेश में रहने के बावजूद अपने देश के खाने की बहुत सी चीजें यहां मिल जाती हैं।
सैलरी और बचत का असली हिसाब
सऊदी अरब आने वाले ज्यादातर लोगों का सबसे बड़ा मकसद होता है—कमाई करना और परिवार के लिए पैसे बचाना।
लेकिन यहां यह समझना जरूरी है कि हर व्यक्ति की सैलरी और बचत एक जैसी नहीं होती।
किसी वर्कर की सैलरी कम हो सकती है, किसी की ज्यादा। किसी को कंपनी की तरफ से कमरा और आने-जाने की सुविधा मिलती है, जबकि किसी को इनका खर्च खुद उठाना पड़ता है।
इसी तरह ओवरटाइम मिलने या न मिलने से भी महीने की कमाई बदल सकती है।
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि सऊदी में हर वर्कर हर महीने एक निश्चित रकम बचा लेता है।
बचत किन चीजों पर निर्भर करती है
बचत किन चीजों पर निर्भर करती है?
अगर कंपनी या कफ़ील की तरफ से रहने की जगह और आने-जाने की सुविधा दी जाती है, तो वर्कर भाई का महीने का अपना खर्च कम हो सकता है।
वहीं खाने, मोबाइल, निजी जरूरतों और दूसरी चीजों का खर्च हर व्यक्ति की अपनी जरूरत के हिसाब से अलग हो सकता है। ओवरटाइम से मिलने वाली अतिरिक्त कमाई भी बचत पर असर डाल सकती है।
इसलिए सऊदी में रहने वाले किसी भी वर्कर की बचत सिर्फ सैलरी पर निर्भर नहीं करती, बल्कि महीने के खर्च और मिलने वाली सुविधाओं पर भी निर्भर करती है।।
मोबाइल और इंटरनेट
सऊदी में रहने वाले भारतीय भाइयों के लिए मोबाइल और इंटरनेट रोज की जरूरत बन चुका है।
घर India में परिवार से बात करनी हो, वीडियो कॉल करनी हो व्हाट्सऐप चलाना हो या कोई जरूरी ऑनलाइन काम करना हो मोबाइल इंटरनेट की जरूरत पड़ती है।
कौन सा सिम और कौन सा पैकेज लेना है, यह आपके इस्तेमाल और बजट पर निर्भर करता है।
घर India पैसे भेजना
सऊदी में काम करने वाले बहुत से भारतीय भाई हर महीने अपनी कमाई का कुछ हिस्सा घर भेजते हैं।
किसी के घर में बच्चों की पढ़ाई का खर्च है, किसी को घर बनाना है, किसी को माता पिता की मदद करनी है और किसी को परिवार के दूसरे खर्च पूरे करने हैं।
इसलिए यहां रहने वाला हर भाई अपनी जरूरत और कमाई के हिसाब से पैसे बचाने की कोशिश करता है।
लेकिन घर पैसे भेजने से पहले अपने सऊदी के जरूरी खर्च का हिसाब रखना भी जरूरी है। पहले अपना जरूरी खर्च, फिर बचत और उसके बाद घर भेजने की रकम तय करना बेहतर रहता है।
पैसे भेजते समय हमेशा भरोसेमंद और तरीके का इस्तेमाल करें।
परिवार से दूर रहने का दर्द
सऊदी में रहना सिर्फ कमाई और पैसे बचाने का नाम नहीं है।
बहुत से भाइयों के लिए सबसे मुश्किल चीज अपने परिवार से दूर रहना होती है।
दिनभर काम करने के बाद कमरे पर लौटने पर माता पिता बच्चों, पत्नी, और घर की याद आना आम बात है।
मोबाइल और वीडियो कॉल की वजह से परिवार से बात करना अब आसान हो गया है, लेकिन घर की कमी पूरी तरह खत्म नहीं होती।
यही वजह है कि सऊदी में रहने वाले कई भारतीय भाई खाली समय में अपने दोस्तों और अपने ही इलाके के लोगों के साथ समय बिताते हैं।

भारतीय भाइयों के बीच अपना सा माहौल
सऊदी के बड़े शहरों में आपको भारत के अलग-अलग राज्यों के लोग मिल जाएंगे।
कोई उत्तर प्रदेश और बिहार से है, कोई राजस्थान से, कोई केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश या तेलंगाना से।
सबकी भाषा और रहन-सहन थोड़ा अलग हो सकता है, लेकिन विदेश में रहने की वजह से एक-दूसरे से जुड़ाव बना रहता है।
नए आने वाले भाई को अगर कमरा ढूंढना हो, खाना बनाना सीखना हो या किसी जरूरी काम की जानकारी चाहिए हो तो वहां पहले से रहने वाले लोग अक्सर मदद कर देते हैं।
इस तरह विदेश में रहते हुए भी कई भाइयों को अपने लोगों के बीच रहने जैसा एहसास होता है।
आने-जाने की जिंदगी
अगर कंपनी की तरफ से आने-जाने की गाड़ी मिलती है तो रोज काम पर जाना आसान हो जाता है।
कुछ भाई अपनी गाड़ी चलाते हैं, जबकि कुछ लोग बस, टैक्सी या दूसरे साधनों से काम पर आते-जाते हैं।
यह आपकी नौकरी और रहने की जगह पर निर्भर करता है।
इसलिए नौकरी लेने से पहले यह जरूर पूछें कि घर से काम की जगह कितनी दूर है और आने-जाने की सुविधा कौन देगा।
इकामा और जरूरी पेपर का ध्यान
सऊदी में रहने वाले हर भारतीय भाई के लिए इकामा बहुत जरूरी है।
इकामा कब खत्म हो रहा है, मेडिकल इंश्योरेंस कब तक है और दूसरे जरूरी पेपर सही हैं या नहीं इन चीजों पर ध्यान देना चाहिए।
अगर इकामा रिन्यू कराने, नौकरी बदलने, फाइनल एग्जिट या एग्जिट-री-एंट्री जैसी कोई जरूरत हो तो अपनी कंपनी के एचआर/एडमिन या संबंधित सरकारी सिस्टम से सही जानकारी लेना बेहतर है।
अपने पासपोर्ट और जरूरी पेपर की कॉपी भी सुरक्षित रखें।
सऊदी के नियमों का ध्यान रखना जरूरी है
सऊदी अरब में रहने वाले हर विदेशी व्यक्ति को यहां के कानून और नियमों का पालन करना चाहिए।
बिना अनुमति काम करना, गलत तरीके से पैसे का लेन-देन करना या किसी गैर कानूनी काम में शामिल होना परेशानी खड़ी कर सकता है।
खासकर जो भाई पहली बार सऊदी आ रहे हैं, उन्हें अपनी नौकरी, कफील और कंपनी से जुड़ी शर्तों को अच्छी तरह समझना चाहिए।
सऊदी में रहना है तो यहां के नियमों की जानकारी रखना बहुत जरूरी है।
त्योहार और छुट्टियों का माहौल
घर से दूर रहने वाले भारतीय भाइयों के लिए त्योहारों का समय थोड़ा भावुक भी होता है।
ईद के समय सऊदी में अलग माहौल देखने को मिलता है। वहीं भारतीय भाई अपनी छुट्टियों और उपलब्ध जगह के हिसाब से दिवाली, होली, ओणम और दूसरे त्योहार भी दोस्तों के साथ मनाते हैं।
कई लोग मिलकर खाना बनाते हैं, मिठाई बांटते हैं और अपने देश की यादों को साथ लेकर त्योहार मनाते हैं।
ऐसे मौकों पर परिवार से दूर रहने का एहसास थोड़ा कम होता है।
निष्कर्ष
सऊदी अरब में भारतीय भाइयों की जिंदगी हर किसी के लिए एक जैसी नहीं होती।
किसी को अच्छी सैलरी के साथ कमरा और आने-जाने की सुविधा मिलती है, तो किसी को इन चीजों का खर्च खुद उठाना पड़ता है। किसी की नौकरी में ओवरटाइम मिलता है तो किसी की नौकरी में नहीं।
लेकिन एक बात ज्यादातर लोगों में सामान्य होती है मेहनत और परिवार के लिए कुछ बेहतर करने की कोशिश।
भारत से दूर रहकर काम करना आसान नहीं होता। गर्मी, काम का दबाव, परिवार से दूरी और रोज की जिम्मेदारियों के बीच भारतीय भाई मेहनत करके अपने घरवालों की मदद करते हैं।
अगर आप पहली बार सऊदी आने की सोच रहे हैं तो सिर्फ सैलरी देखकर फैसला न करें। रहने की जगह, खाना, आने-जाने की सुविधा, मेडिकल इंश्योरेंस, काम के घंटे और ओवरटाइम जैसी चीजों के बारे में भी पहले से जानकारी लें।
क्योंकि सऊदी में आपकी असली बचत सिर्फ सैलरी पर नहीं, बल्कि आपके महीने के खर्च और कंपनी की तरफ से मिलने वाली सुविधाओं पर भी निर्भर करती है।
नोट: सऊदी अरब में सैलरी, रहने का खर्च, खाने का खर्च और बचत हर इंसान की नौकरी, कंपनी, शहर और रहन सहन के हिसाब से अलग हो सकती है। इसलिए ऊपर दी गई जानकारी सामान्य समझ के लिए है।
